सिर्फ एक दिन का पुण्य मोटिवेशनल कहानी हिंदी प्रेरणादायक कहानी
किसी ने बड़े कमाल की बात कहि है
कि कोई भी व्यक्ति हमारे पास तीन कर्म से आता है ,
पहला भाव से,
दूसरा अभाव से
और तीसरा प्रभाव से
अगर कोई भाव से आए तो उसे प्रेम दो
अगर अभाव में है तो उसकी मदद करो

और अगर कोई प्रभाव में आए तो यह जानकर के प्रसन्न हो जो कि परमात्मा ने आपको इतनी क्षमता दी है
कि आप से लोग प्रभावित है
निर्जला एकादशी का दिन है सभी नौकर भी सब लोग सेवा में लगे हुए थे , वहां से भिखारी निकला और उसने भी वहां से एक नहीं चार गिलास शरबत पिए और फिर आगे निकल गया।
इस घटना के एक महीने बाद वहां तस्वीर बदल चुकी थी, सामान्य से सड़क के लोग भीड़ तो थी नहीं ।
क्योंकि सेठ जी की दुकान के बाहर कोई शरबत की, जो स्टॉल तो लगी नहीं थी। वहां से वही भिखारी फिर से निकलता है।
और गर्मी के दिन थे । जाकर के सेठ जी को आवाज देता है । कि सेठ जी पानी पिला दो ,साहब बड़ी प्यास लगी है , रोटी खिला दो, सज्जन सेठ जी थोड़े पैसे दे ।
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लेकिन सज्जन सेठ जी को उसे भिखारी पर गुस्सा आ जाता है और कहता है
अरे भागो यहां से अभी खाओगे पानी पिला दो फिर खो गए शरबत पिला दो
फिर खाओगे खाना खिला दो फिर कहोगे कुछ पैसे दे दो।
लेकिन भिखारी सेठ जी को याद दिलाते हुए कहता है सेठ जी मैं तो यहां से चला जाऊंगा
लेकिन आपको एक बात कहता हूं आपको एक बात याद दिला देता हूं।
एक महीने पहले यही से निकला था निर्जला एकादशी का दिन था,
सेठ जी आपने तो कथा की थी पाठ किया था , और बाहर शरबत की जो है स्टॉल लगाई थी ।
और उस दिन तो आप बड़ा रोक रोक करके लोगों को बड़ा शरबत पिला रहे थे ।
मुझे भी अपने पिलाई थी आपको याद नहीं होगा लेकिन हमें बहुत अच्छे से याद है
आपने हमें चार गिलास शरबत पिलाई थी ।

लोगों को पानी पिला रहे थे शरबत पिला रहे थे पुण्य कमा रहे थे
लेकिन आज ना सेठ जी आपने वह सब पुण्य गवा दिया।
इतना कह कर भिखारी वहां से आगे चल दिया की तभी सेठ जी को
अपने आप पर शर्म आती है और अपने आप में सोचने लगते हैं अरे या मैं क्या कर रहा हूं।
फिर सेठ जी अपने गाड़ी से उतरते हैं और भिखारी को एक साफ गिलास पानी
अपने हाथों से देते हैं और कहते हैं हमें माफ कर दीजिए हमसे गलती हो
गई क्योंकि पुण्य सिर्फ एक दिन से नहीं होता उसे हर रोज करना पड़ता है यह लीजिए पानी पी लीजिए।
भिखारी मुस्कुराते हुए कहते हैं अच्छा हुआ राजन आपको यह बात देर से ही सही लेकिन समझ में आई तो।
और बस मैं आपसे यह कहना चाहता हूं कि
आप अच्छे इंसान है , यह जो आपके अंदर गुण है मानवता का इसको जारी रखें।
और सिर्फ एक दिन का का पुण्य मत कमाइएगा,
ऐसा मत कीजिएगा की एक दिन आप शरबत पिला दे और दूसरे दिन आप अपनी के लिए भी डांट कर भगा दे।
कहानी का निष्कर्ष
बड़ी छोटी सी कहानी है लेकिन हमें यह सिखाती है की पुण्य कमाना है
तो हर दिन कमाए और अपने व्यवहार में
मबदलाव लाये ।
अपने आचरण में बदलाव लाये ।
वरना लोग यह कहेंगे कि सिर्फ एक दिन का ही पुण्य कमाते हैं।
बाकी दिन तो पाप करते हैं।