त्याग वाली मोहब्बत एक प्रेम कथा Heart Touching Hindi Love Story

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त्याग वाली मोहब्बत 🌹मोहब्बत एक प्रेम कथा

स्क्रिप्ट राइटर बनने का सपना 

“आदि” शबनम से बहुत मोहब्बत करता था वह स्क्रिप्ट राइटर बनकर

नई-नई फिल्में की रचना करना चाहता था और वह इस

काम के लिए दिन-रात मेहनत भी कर रहा था.

लेकिन आदि की तब किसी को दिखाई नहीं देता था आदि बहुत ही

गरीब परिवार का लड़का था, जिसके पास एक छोटी सी झोपड़ी थी .

और झोपड़ी में दो छोटे भाई एक बहन और एक बूढी मां और एक बुजुर्ग पिता रहते थे,

बुजुर्ग पिता चप्पल जूता सीखने का काम करते और मां दूसरे के घर गोबर उठाने का काम करती है.

आदि हर रोज स्कूल जाता और अपने सपनों को पूरा करने के लिए पूरे दिलो जान से मेहनत कर रहा था.

दिन में स्कूल की पढ़ाई और रात में वर्ल्ड इंडिया राइटर कंपटीशन की तैयारी करता.

किसी भी चीज को सुचारू रूप से लिखना और अच्छी राइटिंग

स्किल होने के कारण आदि पूरे स्कूल में मैट्रिक की परीक्षा में टॉप किया

और अपने मां-बाप का नाम रोशन किया.

🌹मजदूरी और  फीस भरने की कोशिश👩

आगे की पढ़ाई के लिए आदि ने कॉलेज में एडमिशन कराया

और दिन में मजदूरी करके फीस भरने की कोशिश करता.

घर की स्थिति इतनी खराब थी की पढ़ाई में बहुत रुकावट आने लगी थी,

गांव के सभी लोग कह रहे थे, कि आदि को पढ़ाई छोड़कर बाहर

शहर में कोई काम सीखने के लिए चले जाना चाहिए.

इसके लिए उसे कई दोस्तों ने ऑफर भी दिया,

लेकिन सभी को ऑफर को आदि ने ठुकरा दिया.

कॉलेज जाते हैं आदि को शबनम नाम की लड़की से दोस्ती हो जाता है.

शबनम कॉलेज की रईस बाप की बेटियों में एक थी, जिसके पास गाड़ी पैसा सब कुछ था.

आदि के पिता का उम्र 45 साल था पिता भी मजदूरी का काम करते हैं .

और बेटा भी मजदूरी का काम करता इसी वजह से गांव में ज्यादा इज्जत नहीं मिल पाता.

शबनम आदि को वह सब कुछ पूरा करती जो आदि की जरूरत थी,

आदि की सपनों के बारे में भी उसे पूरी जानकारी थी .

शबनम की कोशिश

और उसके सपनों को पूरा करने के लिए शबनम बहुत कोशिश कर रही थी,

जितना उस हो पा रहा था वह सब कर रही थी.

शबनम को कॉलेज में एक और लड़का पसंद करता था जिसका नाम था,

राघव राघव एक दिन शबनम को अपना प्यार का इजहार करता है.

“शबनम मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं, और यह बात मैं

तुमसे बहुत पहले से कहना चाहता था लेकिन का नहीं पाया”

राघव की बातें सुनकर शबनम आश्चर्यचकित हो जाती है, और उसे समझाते हुए कहती है.

” पर राघव में तुमसे प्यार नहीं करती मैं किसी और से प्यार करती हूं, और मेरा लक्ष्य कोई और है”

इस पर राघव ने बिना सोचे समझे शबनम को एक जोरदार थप्पड़ मार दिया और कहा :

” अगर तुम मेरी नहीं हो सकती तो मैं तुम्हें किसी और

का भी होने नहीं दूंगा चाहे इसके लिए मुझे जो भी करना पड़े”

राघव भी अमीर परिवार का लड़का था,शबनम ने चुनौती देते हुए राघव

से कहा तुम्हें जो उखाड़ना है, उखाड़ लो लेकिन मैं तुमसे कभी मोहब्बत नहीं करने वाली ।

दिन महीने बीते जा रहे थे अब तो आदि कॉलेज जाना भी बंद कर दिया था,

शबनम का  प्यार पवित्र 

क्योंकि किसी ने उसे कह दिया था कि शबनम तुमसे प्यार नहीं करती वह राघव से प्यार करती है.

और यह बात कहने वाला राघव का ही एक दोस्त था जिसका नाम था मंटू.

मंटू नहीं आदि को भड़कते हुए कहा था की शबनम राघव को पसंद करती है.

वह तुम जैसे गरीबों को पसंद नहीं करती है ,

वह तुम्हें कपड़ा पोशाक कॉपी किताब इसलिए देती है ताकि तुम गरीब सब खुश रह सको .

और तुमसे मोहब्बत नहीं करती और मंटू की बात को आदि सच मान लेता है.

और वह पढ़ाई लिखाई छोड़कर मजदूरी का काम में ज्यादा मन लगने लगता है.

इधर शबनम को कॉलेज में मन नहीं लग रह और वह व्याकुल सी हो रही थी.

शबनम आदि के बिना जी नहीं पा रही थी इसलिए वह

एक दिन आदि के घर का पता पूछते पूछते आदि के घर पहुंच जाती है.

घर पर आदि के मां-बाप मिलते हैं और शबनम आदि के मां-बाप

से आदि का पता और हाल-चाल पूछती है.

तो इस पर आदि के पिताजी कहते हैं :

“बेटी आदि पढ़ाई लिखाई अच्छे से नहीं करता है ,वह खोया खोया सा रहता है ,

❤बिखरते सपने आदि के 🌹

उसके मन में कितने सारे सपने थे कुछ बनने का लेकिन सब बिखरते हुए नजर आ रहे हैं”

“बेटी शबनम तुमसे हमें यही आशा है ,कि तुम कुछ ऐसा करो ,

जिससे आदि अपने सपनों में एक नई उड़ान भर सके और कुछ बन सके “

सुबह से शाम होने वाली थी और अभी तक आधी घर पर नहीं पहुंचा था,

और तब तक शबनम आदि के इंतजार में वहीं पर बैठी हुई थी,

शबनम आदि के मां-बाप से कहती है चाचा जी आज जो मैं करने वाली हूं

शायद उससे आदि हमसे हमेशा हमेशा के लिए खफा हो जाए लेकिन यह

सच्चाई कभी भी आदि को मत बताना.”

“आपको मेरी कसम है ,अगर आपने आदि को आज की सच्चाई बता दिया,

तो वह जिंदगी में कभी नहीं मिल पाएगा .”

आदि के पिता शबनम को यह आश्वासन देते हैं कि बेटा चाहे कुछ भी हो जाए,

मैं अपने बेटे आदि को कामयाब होते हुए देखना चाहता हूं.

शाम के लगभग 6:30 बजे हुए थे कि आदि अपने घर पहुंचता है .

वहां शबनम आदि का इंतजार कर रही थी आते ही शबनम आदि से बोली “कैसे हो “

तो आदि ने उल्टा जवाब दिया

“मैं जैसा भी हूं ठीक हूं, और तुम्हें इससे कोई लेना देना नहीं”

इस पर शबनम ने आदि को उसके मां-बाप के सामने जोर से दो-तीन थप्पड़ लगा दिए और बोली:

” लेना देना तो मुझे तब भी था जब तुम मेरा है और लेना-देना तब भी रहेगा जब तू किसी और का रहेगा,

चल अभी के अभी मैंने जो तुम्हें रिंग दिया था, वह रिंग दो मैंने जो तुम्हें सोने का चैन दिया था,

वह चैन दो .और अपना शर्ट पैंट जो भी मैं दी हूं ,

सब के सब मुझे दो, अब हमें तुमसे दोस्ती नहीं रखना. “

आदि ने जोर से चिल्लाते हुए कहा तुम किसी और से मोहब्बत करती हो,

और मुझे डांटती हो?

यह लो अपनी सारी सोना चांदी कपड़े यह सब ले लो “

और सब कपड़ा सोना चांदी रिंग आदि शबनम के हाथों में थमा दिया.

शबनम ने एक बार फिर आदि को थप्पड़ चढ़ाते हुए बोली

“तुम गरीब थे गरीब हो और गरीब ही रहोगे चाहे मैं कितना भी मेहनत कर लूं ,

तुम्हें पढ़ने लिखने का तुम जिंदगी में कुछ नहीं कर सकते . “

“अगर जिंदगी में कुछ कर सकते हो तो करके दिखाओ लेकिन तुम

जिंदगी में कुछ कर ही नहीं सकते क्योंकि तुम्हारी उतनी औकात ही नहीं है.

“तुम एक जिंदा लाश हो तुम्हारा सपना मर चुके हैं,

तुम जिंदगी में कुछ करने लायक नहीं हो,,

💖क्यू दुनिया की कोई भी लड़की पसंद नहीं करेगी 👩

तुम अपने मां-बाप के लिए बोझ हो तुमसे मैं तो क्या,

दुनिया की कोई भी लड़की प्यार करना पसंद नहीं करेगी ,

क्योंकि तुम जिंदगी में कुछ करने लायक हो ही नहीं ।

जिस दिन तुम्हारी हैसियत जिस दिन तुम्हारी औकात अच्छी हो जाए ना ,

उस दिन तुम किसी भी लड़की से मोहब्बत करने के लायक हो जाओगे ।

उसे दिन हमको दिखाना अपना रॉब

और इतना बोलकर शबनम रोती हुई अपने गाड़ी में बैठी और उसके घर से चल दिए।

शबनम अपने घर पहुंची और पूरी तरीके से बिस्तर पर लेट कर कपस कपस का रो रही थी ।

शबनम अपने इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के लिए

रांची से दिल्ली चली गई और आदि गांव में ही रह गया।

शबनम की कही बातें आदि को सुकून से जीने नहीं दे रही थी

आदि ने एक बार फिर तय किया कि मैं स्क्रिप्ट राइटर बंद कर एक

ऐसा फिल्म बनाऊंगा जो मेरी शबनम की जिंदगी से जुड़ी होगी ।

और उसकी औकात दिखाऊंगा उसकी औकात दिखाने के लिए आदि

ने दिन-रात मेहनत करना शुरू कर दिया ।

दिन को रात नहीं कहता रात को दिन नहीं कहता और अपने राइटिंग

स्किल को इतना सुंदर स्किल निखार की अब उसे हर कोई पसंद करने लगा था ।

शबनम से बिछड़ कर आदि को लगभग 7 साल हो चुके थे इन 7 सालों में ना शबनम ने

आदि को फोन किया ना आदि ने शबनम को मिलने का प्रयास किया।

7 साल बाद जब आदि बहुत बड़ा राइटर बन गया । तब उसकी चर्च देश में होने लगा ।

अब आदि एक कामयाब राइटर पैसे वाला व्यक्ति नाम दौलत शोहरत

सब कुछ अपने नाम कर चुका था अब आदि एक हीरोइन से शादी करने का फैसला किया।

अगले दिन शबनम आदि के ऑफिस आती है और आदि को मुबारकबाद देता है,

इस पर आदि ने शबनम को कहा तुम्हारी औकात नहीं है

हमारे ऑफिस में आने की तुम बाहर खड़ी रहो “

आदि ने यह बात शबनम को चिल्लाते हुए कहा

शबनम खामोशी से बाहर निकल गई रोते हुए और रोती हुई आगे बढ़ रही थी

कि तभी शबनम का हाथ किसी ने पकड़ लिया।

शबनम जब पीछे मुड़कर देखी तो उसका हाथ पकड़ने पकड़ने वाली

कोई और नहीं आदि की मां थी और उसका हाथ पड़कर आदि की मां

आदि के ऑफिस में आती है और कहती है आदि देखो कौन मिलने आया है तुमसे”

तो आदि ने मां की तरफ देखते हुए कहता है देखा मैन देखा यह

वही लड़की है जिसने मुझे औकात दिखा दी थी आज इसकी औकात क्या है

इसकी औकात नहीं है मेरे ऑफिस में आने की और ना ही मेरे सामने खड़ी रहने की । “

तभी आदि की मां आदि को एक जोरदार थप्पड़ मारते हुए कहती है:

“आज जो तू इतना कामयाब है वह सिर्फ और सिर्फ शबनम की वजह से है .

सबनम का प्यार मे दर्द 

मैं तुझे उसे तरह से समझा नहीं सकती थी उसे तरह से दांट  नहीं सकती थी

तुम्हारी औकात तुम्हें नहीं दिखा सकती थी .

इसलिए मैंने इस काम के लिए शबनम बेटी को परफेक्ट चुनाव किया .

और इसने वही किया जो हमने इसे करने को कहा आज अगर तुम कामयाब हो

तो सिर्फ और सिर्फ शबनम की वजह से ।

थोड़ी देर के लिए आदि का दिमाग घूम गया फिर उसने समझदारी से सोच तो उसे महसूस हुआ।

कि अगर उसे दिन मुझे शबनम इतनी सारे बातें मुझे नहीं कहती मुझे

नहीं डरती तो शायद मैं कभी इतना बड़ा मुकाम पर नहीं पहुंच पाता।

इसलिए आदि ने अपनी मां से कहा “सॉरी मां मुझे माफ कर दो । “

आदि की मां आदि से कहती है माफी मांगना है तो शबनम से मांगो

जिसने तेरे शहर में जाने के बाद भी हम लोगों का

ख्याल रखी और हम लोग के खर्च भी यही उठा रही थी। “

शबनम वहां से चल देती है और उसकी मां से कहती है मां मुझे माफ कर दो

मैं जा रही हूं मैं अब इसके लायक नहीं हूं और रोटी भी अपने हाथों से

आंखों की आंसुओं को पहुंचते हुए वहां से आगे कदम बढ़ाती है।

आदि का माफीनामा 

तभी आदि शबनम का हाथ पकड़ कर पैरों पर गिर कर हाथ

जोड़कर कहता है शबनम मुझे माफ कर दे तुम

ही मेरी जीवन की वह देवी हो जो जीवन को सवार रही थी ।

लेकिन मुझे आज तक नहीं पता चला मैं तुमसे हाथ जोड़कर माफी मांगता हूं ,

मुझे माफ कर दो तुम वह देवी हो जो हमें कामयाब

करने के लिए अपनी खुशियों को बलिदान कर दी।

शबनम अपने हाथों से आंसुओं को पूछते हुए आदि को उठती है

और गले से लगाकर रहती है इसमें तुम्हारा कोई कसर नहीं है”

मैं तुम्हारे लायक हूं या नहीं हूं यह तो मैं नहीं जानती लेकिन

मैं इतना जानती हूं कि जितनी मोहब्बत मैंने

तुमसे की है पूरी कायनात मिलकर भी तुम्हें नहीं कर सकती ।

हमने तुम्हारे इश्क में वह दर्द सहा है जो मौत से कम नहीं अगर मौत भी आ जाती तो ,

मैं हंस कर कबूल कर लेती लेकिन तुम्हारी जुदाई बर्दाश्त नहीं होती थी “आदि”।

आदि एक बार फिर से शबनम के आंसुओं को पहुंचते हुए कहता है हमें अंदाजा नहीं था।

कि कोई हमारी इतनी भी परवाह करता है अब यह जिंदगी सिर्फ

और सिर्फ तेरे नाम है इस जिंदगी पर सिर्फ और सिर्फ तुम्हारा हक है।

बलिदान मोहब्बत 

तभी आदि के पापा का वहां एंट्री होता है और अधिक के गालों

को थपथपाते हुए कहते हैं यही तो है मोहब्बत  आदि दूसरों के लिए खुद का बलिदान देना यही है .

सच्ची मोहब्बत शबनम ने तुम्हारे लिए क्या-क्या शाह है इसका अंदाजा तुम्हें अब लगा है ,

अगर शबनम ना होती तो आज तुम लेबर का काम कर रहे होते मोहब्बत में त्याग और बलिदान दोनों चाहिए,

जो हमारे शबनम में बखूबी कूट-कूट कर भरा हुआ है तुम्हारी दुल्हन कोई बनेगी तो वह है शबनम ।

शबनम रहती है पापा बहुत दिन हो गए हम लोगों ने कभी एक साथ बैठकर खाना नहीं खाया चलिए

आज हम लोग कुछ अच्छा करते हैं। और अच्छा खाते हैं और फिर सभी

एक साथ एक परिवार होकर शबनम के मां-बाप से मिलने के लिए वहां से निकाल देते हैं ।

आज पूरा परिवार खुश है और आदि कामयाब है और शबनम भी कंप्यूटर सॉफ्टवेयर इंजीनियर है।

त्याग वाली मोहब्बत 🌹मोहब्बत एक प्रेम कथा

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KISSA KAHANI