सातोंजन्म एक सामाजिक कथा Saaton Janm: A Social Story भाग 2
| Saaton janam 👌 सातोजन्म भाग 1 |
| पिछले भाग मे आप ने पढ़ा था –
इस गांव से शांति से कहीं दूर चले जाएं इसी में आपको भलाई है, इतना ही कहकर प्रेम वहां से अपने घर की ओर चल पड़ा। “ अब आगे : –
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प्रेम अपनी पत्नी चंपा को सारी सारी की सारी बातें जाकर बता देता है ।
चंपा बोली: “हमको बहुत डर लग रहा है स्वामी कहानी उसे साधु की वजह से कुछ गड़बड़ ना हो जाए ।”
प्रेम थोड़ा उदास मन से बोल चंपा उसे साधु की वजह से तो मुझे भी डर लग रहा है
तभी चंपा अपने पति प्रेम को हिम्मत बनाते हुए और उसके हाथों को सहलाते हुए कहती है ।
चलो छोड़ो उसे साधु की बातें को, हमें अपने नागेश्वर बाबा पर पूरा विश्वास है ।
वह हमारे साथ कभी गलत नहीं होने देंगे ,और जो होगा हमें नागेश्वर बाबा पर छोड़ देना चाहिए।
चंपा और प्रेम दोनों नाग नागिन के सच्चे भक्त हैं उन्हें अपने नागेश्वर बाबा पर पूरा विश्वास होता है ।
लेकिन गांव वालों का मानना था कि वह जो भी चमत्कार दिखाते हैं
वह कोई नागेश्वर बाबा का चमत्कार नहीं कोई देवी देवताओं
का चमत्कार नहीं, बल्कि यह एक ढोंगी और नजर बंध है।
अटूट प्रेम – सातोंजन्म एक सामाजिक कथा
और चंपा एक डायन है जो तंत्र-मंत्र के बल पर यह सब
कुछ करती है और लोगों को बेवकूफ बनाती है।
चंपा और प्रेम दोनों मंडी मन बहुत खुश नजर आ रहे थे और वह उसी रात के प्रेम मिलन किए।
प्रेम और चंपा को सहलाते हुए प्यार से प्यार किया और प्यार दिया।
और रात को दोनों एक ही चारपाई पर सो गए इस प्रकार दोनों का प्रेम मिलन हुआ।
बाबा अपने चार चेलों के साथ अपने दुश्मनी निकालने के लिए चल पड़ा।
साधु बाबा बोला चलो आज है काली रात और आज ही के दिन प्रेम का खेल तमाम कर देते हैं ।
और अपने तांत्रिक विद्या से बाबा ने प्रेम को मार डालने का फैसला किया।
आखिरकार वह पल भी आ गया जब साधु ने अपने चार चेलों के
साथ मिलकर प्रेम को तांत्रिक विद्या से मूर्छित कर दिया । और फिर जान से मार दिया ।

चंपा की इज्जत – सातोंजन्म एक सामाजिक कथा
और उसकी पत्नी को हाथ लगाने के लिए आगे बढा लेकिन चंपा
उन साधु के चेलों के चंगुल से भागने में कामयाब हो गई।
और इस प्रकार से चांपा साधु के चंगुल से भाग खड़े हुए ।
बाबा उसके चेलों ने चंपा को पकड़ने का पूरा प्रयास किया लेकिन अभी तक वह अ
सफल है।
आगे आगे चंपा दौड़ रही थी तो पीछे-पीछे लुटेरे चंपा की इज्जत के पीछे भाग रहे थे।
रास्ते में जाते-जाते चंपा को एक नदी पार करना था
जिस नदी में जहरीले सर्प और बड़े-बड़े मछली और मगरमच्छ रहते थे ।

चंपा जान देती कि इज्जत
चंपा उसे नदी के पास जाकर खड़ी हो गई अब वह सोच में पड़ चुकी थी
या तो मेरी जान जाएगी या तो मेरी इज्जत जाएगी।
दोनों में से एक चीज कहीं बचाना तय है तभी वह सूची मार जा
पर पाप का ढाबा ना लगे दे इतने में बाबा आ गया ।
और चंपा के साड़ी के पल्लू पकड़ लिया और नहीं छोड़ रहा था ।
चंपा इस प्रकार नदी में दौड़ गई बाबा देखते ही रह गया ।
और बाबा के हाथ में चंपा का साड़ी का पल्लू खुल कर हाथ में ही रह गया।
नदी में चंपा का साड़ी आधा डूबा हुआ था और साधु बाबा चंपा के साड़ी को ऊपर खींच रहे थे।
कुछ क्षण बाद पता चला कि चंपा साड़ी में नहीं है ।
और सिर्फ साड़ी खुला हुआ है साधु ने इधर-उधर देखने का कोशिश किया ,
लेकिन चंपा अपने अर्थ नंगी और में ही विलुप्त हो चुके थे ।
कहीं भी उसका दर्शन नहीं हो पा रहा था साधु बाबा सोचा अब तो चंपा नदी में डूब कर मर चुकी है।
कुछ देर इंतजार करने के बाद भी उसका वहां पता नहीं चला।
उसे नदी में एक शेषनाग था जो चंपा को लपेटकर बांध लिया ।
और नदी के दूसरे छोर की ओर अंदर ही अंदर ले गया ,और जमीन पर रख दिया ।
कुछ पल के बाद चंपा को होश आया ,और वह इधर-उधर देखने पर कोई भी नजर नहीं आया।
चंपा मन ही मन सभी देवताओं को धन्यवाद करने लगी।
चंपा का बेटा का जन्म
और अपने नागेश्वर बाबा की हाथ जोड़कर विनती करने लगी हो
तो ऐसा लग रहा था जैसे सात जन्म पूरा हो गया है।
चंपा का जिंदगी जैसे तैसे गुजर रहा था कुछ ही दिनों में चंपा
ने एक पुत्र को जन्म दिया जिसका नाम था “नागेश”
चंपा उसे खूब प्यार देती और अपने हाथ से खेलाती ।
नागेश अत्यंत मनोहर और अकर्मक सा लगता था जो एक नाग था ।
जिसका जन्म ब्रह्मा जी मैं इसीलिए दिया था -की नागेश अपने उन बाबा को मार
कर लोगों को शांति प्रदान करें जो दुनिया में अशांति फैलाने का काम कर रहे हैं ।

नागेश 3 साल का लड़का हो चुका था , और वह अपनी मर्जी से
इधर-उधर खेलने कूदने के लिए घूमने के लिए जाने लगा था ।
नागेश को दोनों कल का भरपूर ज्ञान था , वह कभी नाग का रूप धारण कर लेता ।
तो कभी मनुष्य का रूप धारण कर लेता ।
नागेश को एक फल पसंद आ जाता है ।
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बगीचे में और नागेश मनुष्य रूप धारण करके उसे फल की और खाने के लिए आगे बढ़ ही रहा होता है,
कि तभी उसकी मां की चिल्लाहट सुनाई दी।
नागेश अपनी मां की चिल्लाहट सुनकर दौड़कर अपनी मां की और भाग और जाकर देखा ,
तो उसकी मन उदास और आश्चर्यचकित खड़ी थी ।
गुस्से से आंखें लाल थी और नागेश के बारे में चिंता चेहरे पर
साफ झलक रही थी और मन ही मन में गुस्सा थी।
नागेश ने अपनी मां की भावनाओं को समझ लिया, और बिना कुछ कहे नागेश अपनी
मां के गोद में जाकर समा गया।
भाग – 3 continue