स्त्री चरित्र लेखक पवन सागर की एक अद्भुत कहानी :
राखी अपने गांव में अपने चार बच्चों के साथ में रहती थी , जिसमें दो लड़का और दो लड़की थी .
पति प्रकाश मुंबई में एक होटल में काम करता था , दिन रात मेहनत करता अपने परिवार को चलाने के लिए.
और अपने बच्चों का पालन पोषण करने की चिंता में हमेशा लगा हुआ रहता था ।
प्रकाश बहुत ही मेहनती और बहुत ही ईमानदारी के साथ में मुंबई में काम कर रहा था।
वह 6 महीने में एक बार गांव आता और एक डेढ़ माह रहकर फिर वापस मुंबई कमाने चला जाता
यही परिक्रिया के साथ में गुजर बसर हो रहा था .

पत्नी के चरित्र पर पर्दा
वहीं दूसरी और प्रकाश की पत्नी गांव में हमेशा सज सावरकर रहती और अपने बच्चों को ध्यान भी रख रही थी.
लेकिन राखी गांव में रहकर क्या कर रही थी यह पूरे गांव में किसी को भनक तक नहीं लगी हुई थी .
जब भी सारा काम निपट जाता तो राखी मोबाइल पर नए-नए लोगों के साथ में
चैटिंग करती और नए-नए लड़कों के साथ में खूब बातें करती।
सोशल मीडिया के जमाने में राखी को मोबाइल का लत लग गया ।
और नए-नए लड़कों से बात करने का चस्का लग गया ।
राखी सारे बच्चों को सुला देती और रात को लड़कों से मिलने के लिए चली जाती
एक दिन राखी राजू से मिलने के लिए रात में खेत में गई हुई थी
की तभी माधव ने राखी को मिलते हुए पकड़ लिया।
और इस प्रकार की मदद दे राखी की गलती लोगों के सामने आई राखी ने माधव से कहा :
तुम चाहो तो मेरे साथ में जो दिल करे वह कर लो , आप जहां बोलेंगे मैं वहां आपसे मिलने के लिए आ जाऊंगी।
पर मेरी इज्जत को नीलम मत करो माधव ने समझदारी से कम लिया और उसे समझाते हुए कहा ऐसी
गलती दोबारा मत करना जिससे गांव में मुंह दिखाने के काबिल ना रह सको।

होटल में इज्जत को नीलाम
माधव ने राखी को समझा बूझकर भेज दिया , पर राखी को ऐसा लग रह था,
जैसे मैंने कोई जंग जीत ली , राखी की कारनामा यहीं खत्म नहीं होने वाली थी
वह 5 10 दिन ठीक से रही और फिर हर रोज किसी न किसी बहाने से
कभी होटल में कभी जंगल में , तो कभी किसी के घर में जाकर , अपने इज्जत को नीलाम करने लगी।
इधर राखी की बेटी भी जवान हो रही थी और इसके बेटे भी जवान हो रहे थे,
पति बेचारा घर की परेशानियों को निपटने में जिंदगी खत्म कर रहा था
मेहनत करते-करते तो वहीं दूसरी ओर राखी अपने अय्याशी जीवन में व्यस्त थी।
राखी यह सब बात अपने पति को नहीं बता रही थी कहां जाती है क्या करती है
किस मिलती है कुछ भी बात अपने पति को नहीं बताती थी और सारी बातें छुपा कर रखती थी ।
धोखा की सजा
लेकिन दिन मंगलवार को राखी अपने एक नए आशिक से मिलने के लिए जंगल में गई हुई थी
और उसका आशिक भी उसके मजे लेकर उसे खिला-खिला कर उसे घर
वापस छोड़ने के लिए आ ही रहा था की गांव के सड़क के किनारे राखी का दुर्घटना हो जाता है
जिसमें राखी बुरी तरीके से जख्मी हो जाती है और उसका आशिक भी जख्मी हो जाता है ।
जब जख्मी हो जाते हैं तो पता चलता है इन दोनों के कारनामे का तो पूरा गांव तू करने लगता है
और पूरे गांव में रखी बदनाम हो जाती है अब राखी को पूरे गांव में वेश्या नाम दिया गया है
जो अपने जिस्म से बहुत सारे मर्दों को खुश करती है या वेश्यावृत्ति नाम
राखी के ऊपर पूरी तरीके से मैच का रहा था।
लोगों के ताने सुन सुन कर राखी परेशान हो जाती है और अंत में राखी अपने आप को उसे
गहरे कुएं में जाकर डाल देती है जहां से उसे जिंदा वापस आना मुमकिन ही नहीं नामुमकिन था
इस प्रकार राखी का जिंदगी समाप्त हो जाता है और उसके बच्चे आज बिना शिक्षा के
जैसे तैसे जिंदगी जीने को मजबूर हैं और राखी का पति जैसे तैसे अपनी
जिंदगी गुजर बसर करने में लगा हुआ है।
कहानी से सीख
इस कहानी स्त्री चरित्र लेखक पवन सागर की एक अद्भुत कहानी का तात्पर्य यह है
कि अपनों के साथ कभी भी छल नहीं करना चाहिए ।
क्योंकि कर्म का बदला फल मिलता है और चल का बदला चल मिलता है ।
आज नहीं तो कल मिलता है इसलिए जिंदगी में अच्छे कर्म कीजिए जिस
गांव परिवार और घर का नाम रोशन हो सके।