new moral hindi story बच्चों के लिए मोटिवेशनल कहानी / kissa kahani

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new moral hindi story बच्चों के लिए मोटिवेशनल कहानी / kissa kahani : 

चुहा खरगोश की मोटिवेशनल मोरल कहानी आपको इस पोस्ट में देखने को मिलने वाला है

तो पोस्ट को पूरा पढ़िए इसे आपको बहुत कुछ सीखने के लिए मिलने वाला है

तो लिए कहानी की शुरुआत करते हैं।

एक झाड़ी के पास खरगोश और चूहा दोनों एक साथ दोस्त बनकर रहते थे, 

दोनों में काफी घनिष्ठता थी,  दोनों दिन भर अपने-अपने भोजन की तलाश में जाते

और जो भी मिलता लेकर आते और दोनों आपस में मिल बैठकर खा लेते हैं।

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बच्चों के लिए मोटिवेशनल कहानी / kissa kahani

 

 

कुछ दिनों के बाद खरगोश का बच्चा हुआ और वह दूसरी जगह

पर रहने लगा और खरगोश वहीं पर रहने लगा।

बहुत दिनों से चूहा और खरगोश को भोजन नहीं मिल रहा था , तो

दोनों सोच चलो इंसानों के जैसा हम लोग भी भगवान के द्वारा में जाते हैं, 

और भगवान से विनती करते हैं कि,  हे भगवान हमें रात में भूखे मत सुनो हम लोगों को भी भरपेट खाना दो।

अगले सुबह खरगोश और चूहा दोनों तालाब गए नहाए और विष्णु भगवान के मंदिर में चले गए।

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विष्णु भगवान की मूर्ति सामने खड़ी थी खरगोश हाथ जोड़कर खड़ा था,

और चूहा भी हाथ जोड़कर भगवान विष्णु के मूर्ति के सामने खड़ा था,

सबसे पहले खरगोश ने भगवान से विनती की और अपनी कहानी सुनाई,

हे प्रभु मैं बहुत दिनों से भूखा हूं मुझे भरपेट भोजन नहीं मिल पाता है।

विष्णु भगवान ने दोनों की विनती स्वीकार कर ली और खरगोश से कहा:

मांगो खरगोश तुम क्या मांगते हो तुम्हें क्या चाहिए।

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तो खरगोश ने कहा प्रभु मुझे इतना अनाज दे दो कि मैं पूरे साल तक

भूख नहीं रह सकूं उसके बाद में खाने का व्यवस्था कर लूंगा।

भगवान विष्णु ने आशीर्वाद दिया जो कल से तुम तालाब के किनारे एक खेत है,

वहां पर बहुत सारे अनाज रखे हुए हैं , तुम ले लो ध्यान रहे समय

रहते जाना नहीं तो किसान अपना अनाज ले जाएगा।

खरगोश बहुत खुश हुआ और प्रभु का धन्यवाद करते हुए वहां से आगे निकला ।

फिर भगवान विष्णु ने चूहे से कहा : आप भी मांग लीजिए

आपको क्या चाहिए चूहा महाराज ?

तो इस पर चूहे ने भगवान विष्णु को जवाब दिया :

“प्रभु आप से भला क्या छुपाना मैं आपसे कुछ नहीं मांगना है के लिए आया हूं

मैं तो बस इतना चाहता हूं, कि आप जो दे वह हमारे जिंदगी में कम ना हो

और जो मुझे ना मिले उसे बात का मुझे कोई गम ना हो “

” हमें विश्वास है कि आप जो देंगे वह हमारे लिए अच्छा होगा

बाकी सब मैं आप पर छोड़ता हूं “

भगवान विष्णु ने कहा ऐसा ही होगा।

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चूहा और खरगोश दोनों अपने-अपने आवास स्थान पर पहुंच गए,

अगले दिन से खरगोश बैठकर खाने लगा , और चूहा हर दिन की

भांति इधर-उधर घूम फिर कर अपना भोजन का तलाश करने लगा ।

समय बिता गया खरगोश बहुत खुश था , और चूहा अपनी जिंदगी में व्यस्त था।

कुछ दिनों के बाद 1 साल व्यतीत हो गए और खरगोश ने जो प्रभु से मांगा था वह पूरा हो चला था ।

लेकिन चूहे ने कुछ नहीं मांगा था , वह जहां जाता उसे भरपेट भोजन मिल जाता

और वह एक ऐसे आम के बगीचे में और किसान के बीज भंडार में जाता

जहां से उसे पूरी भोजन की व्यवस्था हो जाती थी।

पहले ऐसा नहीं हो रहा था अब चूहा को एहसास हो रहा था

की चलो जो हुआ अच्छा केले हुआ , अब तो खरगोश के पास भजन खत्म हो चला है।

लेकिन प्रभु ने जो मुझे दिया है वह काम नहीं है मैं जहां जाता हूं

मुझे भरपेट भोजन मिल जाता है।

और जो नहीं मिलता है मुझे उसे बात का भी कोई गम नहीं है।

खरगोश एक दिन उदास हो गया और भगवान के चरणों में फिर अकेले जाता है

और अपनी शिकायत करता है तो प्रभु जी खरगोश से कहते हैं।

तुमने जो मांगा था वही तुम्हें मिला है,

चूहे ने कुछ नहीं मांगा था , इसलिए उसे उसके आवश्यकता

अनुसार हमें पूरा करना पड़ रहा है.

कहानी से सीख

इस कहानी से शिक्षा मिलती है कि हमें लालच नहीं करना चाहिए ,

जिस तरह खरगोश ने लालच में आकर मांगा, उसे उसका नतीजा भगतना पड़ा ,

बस खुदा से इतनी सी विनती करो कि हमारे जिंदगी में जो हो अच्छा

हो बाकी सब ऊपर वाले पर छोड़ दो.

तो दोस्तों यह कहानी आपको अच्छी लगी तो

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