धन का लालच भाई-भाई का दुश्मन हिन्दी कहनी 🌿greed for money story

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धन का लालच भाई-भाई का दुश्मन : दोस्तों इस कहानी से आपको बहुत कुछ सीखने के लिए मिलने वाला है.

इस कहानी के माध्यम से पता चलता है की लालच बहुत बुरी भला है,

लालच करने से ना धन बचत है ना रिश्तेदारी बचती है.

किसी भी मामले में आशा से अधिक लालच आपको बहुत नुकसान पहुंचा सकता है,

इसलिए संतोष पर जीवन बीतने से जिंदगी सार्थक और कर्म अच्छे होते हैं,

तो लिए इस कहानी की शुरुआत करते हैं और सीखते हैं कुछ नया.

 

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भाई भाई की मित्रता

 

धर्मपुर गांव में दो भाई रहते थे ,मदन और मोहन दोनों में

काफी घनिष्ठ मित्रता थी ,दोनों जहां जाते साथ में जाते .

जो करते साथ में करते ,दोनों का बचपन बहुत ही गरीबी में बीत रहा था.

लेकिन दोनों भाई में इतने भाईचारे थी , गरीबी उन पर कभी असर नहीं डाल पाई .

और इस प्रकार से दोनों भाई बड़े हो गए।

जैसे ही बड़े हुए दोनों की शादी हो गई. दोनों शिकारी का काम किया करते थे .

दोनों जंगल जाते और शिकार करते.

एक दिन उसे एक हिरन मिल जाती है . दोनों भाई हिरण को मार गिराते हैं।

 

दो भाई की गाथा

 

हिरण बहुत बड़ी थी ,और उसे ढेर सारा पैसा कमाया जा सकता था .

तो बड़े के मन में लालच आ गया.

सोचा क्यों ना इसे, अकेले समेट लिया जाए | उसने छोटे से कहा भाई

इस दिन में गांव नहीं ले जाकर रात में ले जाते हैं ,

क्योंकि अगर दिन में ले गया तो कोई देख लेगा तो हम लोग पर केश भी हो जाएगा ।

और इसे गांव में बटवारा भी करना पड़ेगा ।

मुसीबत बहुत हो सकती है , तो ऐसा करते हैं हम लोग रात में गांव लेकर जाएंगे।

भाई के मन मे लालच

भाई ने भाई की बात मान लिया ।

और शाम हो गया शाम होते ही दोनों भाई एक गाड़ी की व्यवस्था करते हैं । .

और गांव ले जाते हैं , गांव ले जाने के बाद छोटे भाई के भी मन में लालच हो गया ।

क्यों ना इसे अकेले समेट लिया जाए।

ना धन बचा न जान

फिर क्या था छोटे भाई ने खाने में जहर मिलाकर भाई के पास लेकर गया तो

देखा उसका भाई उसे समेटने में लगा हुआ है ।

उसने जैसे ही वहां पहुंचा और बोला मेरा हिस्सा कहां है , तो दूसरे भाई ने

उसे चाकू घूस दिया इस प्रकार उसकी मृत्यु हो जाती है।

उसके बाद जो खाना लेकर गया था, भाई के लाश वही होती है ।

और भाई सोचता है पहले खा लेते हैं

उसके बाद कुछ करते हैं , फिर वह खाना खाता है ,

जैसे वह खाना खाता है ,भाई खुद भी मर जाता है .

इस प्रकार से दोनों भाई मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं अंत में ना जान बचता है

ना धन फिर गांव वाले की मदद से उसे मांस को पूरे गांव में बांट दिया जाता है।

note :

दोस्तों यह : धन का लालच भाई-भाई का दुश्मन हिन्दी कहनी :-

लालच बहुत बुरी बात है , लालच करने से ना धन बचत है ,

ना जान इस कहानी से और भी बहुत कुछ सीखने को मिला है।

क्या आपको समझ में आया तो कमेंट में हमें बताएं अगर आपको ऐसी कहानी पसंद आती है

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