pawan dropati moral story in hindi / hindi moral kahani

 

pawan dropati moral story in hindi / hindi moral kahani : यह हिन्दी मॉरल कहानी अपने बच्चों को जरूर

सुनाए ,

दोस्तों आशा करते हैं स्टोरी आपको अच्छा लगा होगा .
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हमें पूरा विश्वास है कि यह कहानी से आप को बहुत कुछ सीखने के लिए मिला होगा।

 

सवारी घोडा की 

 

द्रौपदी और पवन एक घोड़े को साथ लेकर

रास्ते में घर की ओर जा रहे थे.

चारों तरफ हरा-भरा वातावरण हल्की बादल और मौसम बहुत ही खुशनुमा था.

 

रास्ते में जाते-जाते द्रौपदी और पवन को एक व्यक्ति मिल जाता है.

वह कहता है,
“अरे यार तुम लोगों में अक्ल है कि? नहीं “

घोड़े के रहते हुए तुम लोग दोनों पैदल जा रहे हो.

फिर लिए किस लिए हो , घोड़े को घोड़े पर सवारी करके जाओ.

द्रौपदी और पवन को लगा “हां यह आदमी ठीक कह रहा है ,

 

लोगों की बात सुनने का आसार 

 

हम लोगों को घोड़े पर बैठकर जाना चाहिए,

फिर क्या था ,पवन घोड़े पर बैठ गया .

और द्रोपती पैदल चल रही थी .
दोनों बातें करते हुए जा रहे थे.

कुछ दूर जाने पर फिर एक कपल मिल गया,

एक लड़का और
एक लड़की दोनों ने द्रौपदी और पवन से कहा

“अरे तुम कैसे पागल आदमी हो खुद घोड़े पर बैठकर जा रहे हो.”

और बीवी को पैदल लेकर जा रहे हो, पवन फिर घोड़े से उतर गया .

और कहां शायद यह ठीक कह रहा है.

कुछ दूर जाने के बाद द्रोपती और पवन दोनों घोड़े पर बैठ जाते हैं

फिर उन लोगों को एक कपल मिल जाता है.

और कहता है :-
“अरे यार तुम लोग कैसे लोग हो घोड़े पर बैठकर जा रहे हो .

उसकी जान निकल जा रही है .

तुम लोग उसे पर सवारी कर रहे हो,

फिर इन लोगों को लगा यह ठीक कह रह है , फिर दोनों उतर जाते हैं.

फिर दोनों पैदल ही चल रहे होते हैं ।
कि तभी एक आदमी फिर कहता है ?

अरे घोड़े रहते
हुए तुम लोग पैदल क्यों जा रहे हो.

 

अपनी समझ { मॉरल हिन्दी कहानी } 

 

द्रोपती और पवन को दोनों को कुछ भी समझ में नहीं आता है.

वह खामोशी से जा रहे होते हैं कि, तभी एक साधु उन लोगों को
उदास चेहरा देखकर
उन दोनों को रोकता है ।

और पूछता है “क्या बात है ?
बेटा तुम लोग बताओ क्या हुआ तुम लोग बहुत उदास हो.”

साधु की बात सुनकर द्रोपती
और पवन सारी किस्सा कहानी उसे रास्ते की
जो घटित होती है ।

उसे बताते हैं फिर साधु
कहते हैं बेटा यह दुनिया तुम्हें हर रूप में कोषणा जानती है।

तुम गलत करो तब भी दुनिया तुम्हें टोकेगी ।

तुम अच्छा करो तब भी
दुनिया तुम्हें टोकेगी।

इसलिए तुम दुनिया की बात ना सुनकर तुम अपने दिल की बात सुनो।

जो तुम्हें ठीक लगता है वही करना
दुनिया की बातों में आकर खुद की जिंदगी खराब कभी मत करना ।

अब दोनों को समझ में आ गया था.

कि जब तक हम लोग पैदल ठीक चल रहे हैं।

तब तक ठीक है जब दोनों को थकावट
महसूस होने लगेगी तो घोड़े पर बैठकर सवारी कर लेंगे.

और इसी प्रकार से आगे बढ़ जाते हैं।

दोस्तों इस कहानी से आपको क्या शिक्षा मिलती है .

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