“सबक पिता का ” 💐द मोटिवेशनल चिल्ड्रन स्टोरी
ममता अपने बॉयफ्रेंड से फोन पर बात कर रही थी ममता की उम्र 12 साल की थी , ममता सातवीं क्लास की छात्रा थी , लेकिन वह पढ़ाई के नाम पर स्कूल से मौज मस्ती करने के लिए निकल जाती थी.
एक दिन ममता अपने बॉयफ्रेंड को गार्डन में मिलने के लिए बुलाई और उसके साथ मस्ती करने के लिए और मूवी देखने के लिए और होटल में जाने वाली थी यह सारी बातें फोन पर लगभग हो रही थी.
ममता पर पड़ी पिता की नजर
ममता के पिता बाथरूम सफाई और घर के झाड़ू पोछा लगाने का काम किया करते थे,
वह बाथरूम की साफ-सफाई करके और झाड़ू पोछा करके घर वापस लौटने वाले थे। कि उसकी नजर ममता पर पड़ जाती है।
ममता को अकेले जंगल में देख ममता के पास जाते हैं और बिना कुछ कह एक पेड़ के पीछे छुप जाते हैं,
और वहां से उसकी सारी हरकतों का जायजा लेते हैं.
ममता की हरकतें देखकर ममता के पापा ममता के पास जाते हैं और कहते हैं.
“बेटा तुम अकेले जंगल में इस पेड़ के नीचे क्या कर रही हो”
तो ममता रहती है:
“पापा मैं अपनी फ्रेंड के साथ मूवी देखने के लिए जा रही हूं, और मैं डिनर भी उधर ही कर लूंगी आप चिंता न कीजिए, मैं 7:00 बजे शाम तक घर आ जाऊंगी”
ममता की बात सुनकर उसके पापा बोले:
” ममता बेटा आज हम तुझे मूवी दिखाने के लिए और डिनर करने के लिए लेकर चलते हैं, तुम मेरे साथ चलो।”
क्या करेगी ममता
पिता की बातें को ममता कट न सके और वह उसके साथ चल देती है।
रास्ते में एक मैडम दिखाई देती है मैडम के पास जाकर ममता के पापा कहते हैं।
” मैडम मैं आपका गाड़ी साफ कर देता हूं बदले में मुझे आप कुछ पैसे दे दीजिएगा जो आपका दिल चाहे ।”
” ठीक है साफ कर दीजिए”
फिर ममता के पापा गाड़ी को साफ करते हैं अपने गम से तो गाड़ी की बाल की ममता के पापा को ₹20 पैसा देते हैं। उसे पैसे को लेकर ममता के पापा आगे बढ़ते हैं ममता के साथ में।
गरीब बाप की लाचारी
थोड़ी दूर पर ममता के पापा को एक साहब दिखाई देते हैं वह एक टेबल पर बैठे हुए थे। लेकिन उसके पैरों में जो जुते थे। उसमें काफी घुल लगी हुई थी । ममता के पापा उसके पास जाते हैं और कहते हैं:
” सर मैं आपका जूता साफ कर देता हूं बदले में आपका जो दिल चाहे हमें दे दीजिएगा मेरी बेटी के लिए”
” ठीक है भाई कर दो मेरा जूता साफ”
जूता साफ करने के बाद वह पैसा भी ममता को दे देते हैं, ,और कहते हैं, अभी तो मूवी का दाम निकाला है, अभी तुम्हारे खाने-पीने का दम तो बाकी है। चलो किसी का बाथरूम , किसी का टॉयलेट साफ कर देता हूं। उससे तुम्हारा खाने का हो जाएगा । फिर ढेर सारी मौज मस्ती करेंगे।
ममता के आंखों में पश्चाताप के आंसू
ममता के आंखों में आंसू आ जाते हैं और ममता केहती है “पापा हमें नहीं चाहिए आपके पैसे”
” क्यों बेटा क्यों नहीं चाहिए तुम”
“आप इतनी मेहनत से पैसे कमा रहे हैं और हम उसे बर्बादी में नहीं उड़ा सकते।”
“बेटा मेरा तो हर रोज का काम है जो पैसे तुम हर रोज उड़ाती हो , वह मैं हर रोज इतनी मेहनत से कमाता हूं.”
ममता को मिला पिता का सबक
बेटी ममता पिता को पकड़ कर रोने लगती है और कहती है, पापा आज के बाद में दिल से मेहनत करूंगी, और खूब मेहनत करूंगी , और अब मैं आपका सर गर्व से ऊंचा कर दूंगी, इतनी मेहनत करूंगी की दुनिया मुझे सलाम करें.
ममता के पिताजी अपने बेटी के सर पर हाथ सहलाते हुए कहते हैं , बेटी तुम मेरे लिए बेटी नहीं एक सपना हो एक विश्वास हो एक उड़ान हो, जिसे मैं हमेशा उड़ते हुए देखना चाहता हूं। इसमें ऐसे पंख लगाओ, जिससे पूरा दुनिया रोशन हो जाए। और तुम खुले आसमान में उड़ सकूं”।
बेटी रोते हुए पापा से हां में हां मिलती है , और पिता के हाथ पकड़ कर घर की ओर चल देती है.
कहानी का निष्कर्ष ,कहानी से सीख
दोस्तों इस कहानी से हमें शिक्षा मिलती है, कि जब तक पिता का साया सर पर है, हम दुनिया में कुछ भी करने के लायक हैं, पिता का साया यानि भगवान का साया.
इस कहानी से आपको और क्या-क्या समझ में आती है आप हमें कमेंट में जरूर बताएं। अगर स्टोरी अच्छी लगी तो प्लीज इसे लाइक शेयर और हमारे पेज को फॉलो एंड सब्सक्राइब जरूर करें.
यह खूबसूरत संरचना राइटर पवन सागर द्वारा लिखा गया है।
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