तेरे सपने मेरे सपने। बच्चों के लिए मोटिवेशनल कहानी

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तेरे सपने मेरे सपने। बच्चों के लिए मोटिवेशनल कहानी

सोहनलाल अपने बेटे को डॉक्टर बनना चाहता था उसका बेटा सीधा-साधा भोला भाला

चौथी क्लास में पढ़ने वाला साधारण लड़का था जिसका नाम विशाल था।

एक दिन सोहनलाल से उसका एक दोस्त मिलता है और कहता है:

” अरे सोहनलाल तुम अपने बेटे को क्या बनना चाहते हो”

तो इस पर सोहनलाल ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया:

“भाई मैं तो अपने बेटे को डॉक्टर बनना चाहता हूं क्योंकि डॉक्टर में बहुत पैसा है।

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एक बार मेरा बेटा डॉक्टर बन गया तो मेरे घर पैसों की कोई कमी नहीं होगी”

तो उसे पर सोहनलाल के दोस्त ने कहा अरे यार मैं तो अपने बेटे

को सरकारी नौकरी कराऊंगा गांव में इज्जत भी बहुत मिलेगा और पैसा भी मिलेगा।

सोहनलाल अरे या तो ठीक कह रहा है हमें भी अपने बेटे को पुलिस ऑफिसर बनना चाहिए।

सोहनलाल अपने बेटे विशाल कहता है: “विशाल तुम अब डॉक्टर बनने का

सपना छोड़ दो तुम पुलिस ऑफिसर बनने का सपना के साथ में आगे बढ़ो,

उसमें तुम्हें बहुत पैसा और गांव में इज्जत मिलेगा विशाल खामोशी से बात मान लेता है

और कुछ नहीं कहता है।”

वक्त बीतता जाता है और विशाल अब दसवीं कक्षा में प्रवेश कर चुका होता है।

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एक दिन विशाल की बहन उसके घर आ जाती है और कहती है भैया

आप विशाल को क्या बनाने के लिए सोच रहे हैं”

मदनलाल मुस्कुराते हुए अपनी बहन से कहता है :

” बहन मैं तो अपने बेटी को पुलिस ऑफिसर बनने के लिए सोच रही हूं”

इस पर उसकी बहन रहती है अगर आप पुलिस ऑफिसर बनने के लिए सोच रहे हैं

तो सपना को आज ही तोड़ दीजिए क्योंकि उसमें बहुत खतरा है

उसमें जान जाने का बहुत जोखिम है कभी भी जान जा सकती है “

मदनलाल सोचता है अरे यार मेरी बहन सही कह रही है इस प्रकार मेरा बेटा

विशाल इस दुनिया को बहुत जल्दी अलविदा कह देगा हमें कुछ करना चाहिए ।

शाम को जब बेटा पढ़ने बैठा हुआ था तब श्यामलाल अपने बेटे के पास जाता है और पूछता है:

“बेटा तुम क्या करने वाले हो अपनी लाइफ में बेटा कहता है मैं पुलिस ऑफिसर

की तैयारी कर रहा हूं जैसा आपने कहा था”

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तुम मदनलाल कहता है : बेटा पुलिस की नौकरी करने का सपना छोड़ दो क्योंकि

उसमें तुम्हारी जान का बहुत खतरा है ऐसा करो तुम मास्टर

बनने की तैयारी करो आराम से गांव में रहकर अच्छे पैसे कमाना “

विशाल ने उसमें भी हमें भर दिया और कुछ नहीं कहा।

2 साल बाद जब विशाल इंटर की पढ़ाई कंप्लीट कर चुका था तब उसकी मौसी घर पर आई थी ।

मौसी मदनलाल से पूछती है :

“मदनलाल तुम अपने बेटे को क्या बनाने के लिए सोच रहे हो”

तो मदनलाल कहता है:

“मैं अपने बेटे को मास्टर बनने के लिए सोच रहा हूं क्योंकि उसमें बहुत पैसा है

और गांव में भी रहकर इज्जत भाव के साथ”

तो उसकी मौसी रहती है :

“अरे मेरा बेटा तो होटल में काम कर रहा है, मुंबई में वह महीने के ₹30000 कमा रहा है ।

परिवरिक जिमेदारी टूटते सपने 

 

आजकल नौकरी तो जल्दी लगती नहीं है ?ऐसा करो तुम अपने बेटे

को मुंबई भेज दो होटल में काम करने के लिए ।

30000 का महीना आने लगेगा, तो घर में खुशी का माहौल हो जाएगा ।

और वैसे भी बेटा जवान हो ही गया है।

मदनलाल को लगाओ की विशाल की मौसी सही कह रही है विशाल

को मुंबई भेज देना चाहिए और वह विशाल को पढ़ाई से नाता तुड़वाकर मुंबई कमाने भी देती है।

वहां जाने के बाद विशाल को बहुत शर्मिंदगी महसूस होने लगता है ,

इतनी पढ़ाई लिखाई करने के बाद मेरे पापा ने कमाने ही भी दिया ।

मैं कुछ बनना चाहता था जो यहां रहकर नहीं कर पाऊंगा और मुझे कुछ अलग करना है ।

विशाल ने जैसे तैसे मुंबई में एक महीना काम किया और बिना बताए

किसी को वह वहां से भाग कर अपने दिल को सुकून देने के लिए चेन्नई पहुंच गया ।

चेन्नई में जाने के बाद विशाल ने कंप्यूटर क्लास ज्वाइन किया कर लिया

और अपने मां की इच्छा को पूरा करने में पूरी तरीके से तन मन से लग गया ।

जाने के बाद विशाल ने नया सिम कार्ड लिया और पुराना सिम कार्ड को तोड़कर फेक डाला

ना घर वालों से कोई संपर्क ना रिश्तेदारों से कोई संपर्क ना कोई दोस्तों से संपर्क।

टूटते रिसते सजते सपने 

 

घर में विशाल के भाग जाने की खबर आने से अफरा तफरी का माहौल बन गया था

पिताजी उदास रहने लगे मन भी उदास रहने लगी

और परिवार का जैसे कैसे पालन पोषण होने लगा।

दो-चार साल ना आने के बाद घर वाले समझ लिए की विशाल आप मर चुका है

अब उसके नाम पर मर जाने के बाद जो सारी रस्म में होती है

वह सारा रस्म को पूरा किया गया ।

चेन्नई में अब विशाल को 15 साल हो चुके थे 15 साल होने के बाद

विशाल ने एक सॉफ्टवेयर बनाया और ऑनलाइन बिजनेस शुरू किया।

विशाल ने जिस सॉफ्टवेयर का निर्माण किया उसका नाम रखा मीशो

जहां से खरीदारी ऑनलाइन की जा सकती थी।

अपनी सोच अपनी कंपनी का निर्माण 

 

ऑनलाइन पेमेंट और कैश पेमेंट दोनों का ऑप्शन था।

धीरे-धीरे इसका सॉफ्टवेयर डेवलप होने लगा और लोगों को अच्छा लगने लगा

अच्छा रिस्पांस आने की वजह से विशाल को बहुत ही प्रोत्साहन मिला।

जैसे-जैसे विशाल का बिजनेस डेवलपमेंट करने लगा वैसे-वैसे और भी

उसमें नई-नई चीज विशाल जोडा गया।

3 साल बाद विशाल ने चेन्नई छोड़कर दुबई शिफ्ट हो गया दुबई जाने के बाद

और भी अच्छी कोडिंग की पढ़ाई कंप्लीट किया और अपने अप अपना

सॉफ्टवेयर मीशो को एक नई ऊंचाई तक लेकर गया ।

हैरानी की बात यह थी कि अब तक किसी को भी यह पता नहीं था

कि आखिर मीशो का मालिक कौन है।

लगभग 25 साल के बाद विशाल वापस अपने घर अपने मां-बाप से मिलने के लिए आता है।

गांव में उसे कोई भी पहचान नहीं रहा था लेकिन गांव में भी मीशो का पूरा नाम था

चारों तरफ मीशो का शोर था।

मेहनत का मीठा फल 

 

विशाल के गांव में आते हैं ,जैसे विशाल के रूप में एक भगवान आ गया हो ।

लेकिन अभी किसी को गांव में पता नहीं था कि इतने बड़े कंपनी मीशो का मालिक विशाल ही है।

विशाल अपने मां-बाप से कहता है मम्मी पापा मैं आप दोनों को लेने के लिए आया हुआ हूं

आपको मेरे साथ में चलना है।

🙏विशाल के विशाल के पिता सोहनलाल विशाल से पूछते हैं:

🌿”विशाल तुम क्या काम करते हो”

✅विशाल मुस्कुराते हुए जवाब देता है “पापा आपने जो जो मुझे बनाना चहा

उन सभी में से आपकी मर्जी थी, उसे आपकी खुशी जुड़ी हुई थी,

लेकिन आज जो मैं करता हूं उससे मेरी खुशी आपकी खुशी और पूरी हिंदुस्तान की खुशी जुड़ी हुई है”

अब आपका बेटा वह कंपनी चलाता है जिसे पूरा हिंदुस्तान मीशो के नाम से जानता है।

पापा आश्चर्यचकित जाते हैं और कहते हैं :

” क्या मीशो तुम्हारा कंपनी है उसमें तो लाखों लाख वर्कर काम कर रहे हैं”

विशाल ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया इसमें आपका ही आशीर्वाद रहा अगर

आपने मुझे अच्छी परवरिश नहीं दी होती तो आज मैं उसे मुकाम पर नहीं पहुंचा होता। “

“आपने हमें बहुत कुछ बनाना चाहा लेकिन आपने एक गलती कर दिया पापा, आप लोगों की सुन रहे थे ,”

“अपने बेटे की नहीं सुन रहे थे मैं क्या करना चाहता था उसे पर आपने कभी गौर से पूछा ही नहीं नहीं तो आज ऐसी ऐसी 10 कंपनियां आपके कदमों में खड़ा होती । “

पापा माफी में मांगते हुए कहते हैं बेटा हमें माफ कर दे हमसे बहुत बड़ी गलती हो गई।

बेटा का कर्म पिता का नाम रौशन 

 

तभी विशाल पापा के हाथ पकड़ते हुए कहता है : “पापा आप मेरे लिए भगवान है

और भगवान हमसे माफी मांगे यह हमें अच्छा नहीं लगता हमें आप पर गर्व है।”

कहानी से शिक्षा

इस कहानी तेरे सपने मेरे सपने। बच्चों के लिए मोटिवेशनल कहानी  से हमें यह शिक्षा मिलती है

कि बच्चे जिस दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं पेरेंट्स को इस दिशा में बच्चों को सपोर्ट करना चाहिए।

अलग-अलग लोगों की अलग-अलग सोच होती है वह अलग-अलग बातें करते हैं

लेकिन बच्चा जिस मामले में अच्छा करने की कोशिश करें बच्चे को इस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

आप इस कहानी के बारे में क्या सोचते हैं एक बार कमेंट सेक्शन में जरूर बताएं। लेखक पवन सागर 

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