अहंकार और सच्चे प्यार की कहानी / हिन्दी कहानी

दोस्तों आज मैं आपको अहंकार और सच्ची मोहब्बत की
एक ऐसी कहानी पेश करने करने जा रहा हूं ,

जो आपके दिल को छू जाएगी और एक एहसास देगी तो

कहानी का एक भी पाठ अगर अच्छी लगे तो ,

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तो लिए शुरूआत करते हैं इस अनोखी कहानी को।

 

🌿अहंकार और सच्चे प्यार की कहानी

 

कल्पना ने जोरदार थप्पड़ मारते हुए दीपक से कहा,
“तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे ‘आई लव यू’ कहने की?

यह थप्पड़ तुम्हें हमेशा याद दिलाएगा

कि तुम्हारी हैसियत क्या है और मेरी हैसियत क्या है।”

दीपक ने उदास आवाज में और शांत भाव से कहा,

“मोहब्बत हैसियत और दौलत देखकर नहीं की जाती।

मोहब्बत तो हो जाती है। सच्ची मोहब्बत वही होती है

जो खुद-ब-खुद हो जाए। जो किया जाता है, वह मोहब्बत नहीं, सौदा होता है।”

यह सुनते ही कल्पना ने फिर से एक जोरदार थप्पड़ जड़ दिया और कहा,

“यह थप्पड़ इसलिए है कि तुझे हमेशा एहसास रहे कि मेरी

जैसी लड़की तुमसे मोहब्बत कभी कर ही नहीं सकती।

मेरी हैसियत के सामने तुम एक फकीर हो, गरीब और लाचार

भिखारी कहीं के।”
दीपक ने फिर भी शांत भाव से कहा,

“तुमने जो भी कहा, कल्पना, वह सब सच है।

लेकिन यह भी सच है कि मेरी मोहब्बत झूठी नहीं है।

मेरी मोहब्बत सच्ची है और पवित्र है।

आज तुमने उस हीरे को खो दिया है, जिसे लोग हमेशा कोयला समझते हैं।”

इतना कहकर कल्पना अपनी गाड़ी में बैठी और वहां से चली गई।

लेकिन दीपक वहीं खड़ा रह गया, बिल्कुल शांत और उदास।

 

दीपक का अचानक गायब हो जाना

 

अगले दिन 15 अगस्त था। कॉलेज में स्वतंत्रता दिवस का कार्यक्रम रखा गया था।

सभी छात्र-छात्राएँ कार्यक्रम में आए हुए थे।

उन सब में कल्पना भी बहुत सज-धज कर, सूट-बूट में आई हुई थी।

लेकिन दीपक कॉलेज नहीं आया था।

उस समय किसी ने इस बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया।

इधर दीपक अभी तक घर भी नहीं पहुँचा था।

इस बात से उसके माता-पिता, ममता और साहिल,

बहुत चिंतित हो गए। वे दोनों 15 अगस्त के कार्यक्रम में कॉलेज पहुँच गए,

इस उम्मीद में कि शायद दीपक वहाँ मिल जाए।

लेकिन कॉलेज में भी दीपक कहीं नजर नहीं आया।

यह देखकर ममता और साहिल घबरा गए।

वे कॉलेज के सभी लड़के-लड़कियों से दीपक के बारे में पूछने लगे,

लेकिन किसी को भी उसके बारे में कुछ पता नहीं था।

दीपक के माता-पिता वैसे ही बहुत गरीब थे,

और अब बेटे के अचानक गायब हो जाने

से वे पूरी तरह टूट चुके थे।
दीपक की तलाश करते-करते

ममता और साहिल कल्पना के पास पहुँच
गए।

उन्होंने कहा, “बेटी, क्या तुमने कहीं दीपक को देखा है?”
इस पर कल्पना ने जवाब दिया,

“दीपक? वह तो कल घर की ओर चला गया था।”
ममता ने आँसू भरी आँखों से कहा,

“नहीं बेटा… दीपक अभी तक घर नहीं पहुँचा।”

यह सुनकर ममता और साहिल की आँखों में आँसू आ गए।
वे उदास मन से आँसू पोंछते हुए वहाँ से चले
गए।

🌹दीपक दस साल बाद की सच्चाई

दीपक को गायब हुए पूरे 10 साल बीत चुके थे।
इन दस सालों में न

तो पुलिस उसे खोज पाई, न ही कोई रिश्तेदार और न ही कोई जान-पहचान वाला।

उम्मीद की सारी डोरें धीरे-धीरे टूटती जा रही थीं।

दीपक का कहीं भी कोई सुराग नहीं मिल पा रहा था।

उधर कल्पना ने एक पार्लर खोल लिया था, लेकिन वह

पार्लर की आड़ में जिस्मफरोशी का धंधा चला रही थी।

उसकी कमाई लाखों में हो रही थी।

इसी बीच खबर आई कि शहर में एक सख्त और ईमानदार ऑफिसर आने वाला है।

उस ऑफिसर का नाम सुनते ही शहर के बदमाशों और

गलत काम करने वालों की नींद उड़ गई थी।

सभी को डर था कि अब उनका काला धंधा बंद हो जाएगा।

वह ऑफिसर अभी तक शहर में आया नहीं था,

लेकिन उसके नाम से ही शहर में हलचल मच चुकी थी।

इसी बीच एक दिन दीपक साइकिल से अपने घर की ओर जा रहा था।

किसी को भी यह अंदाजा नहीं था कि वह इतने सालों बाद

अचानक वापस आ सकता है।
दीपक की वापसी और सच का सामना

रास्ते में अचानक कल्पना की गाड़ी से दीपक की साइकिल टकरा गई ,

और वह जमीन पर गिर गया। कुछ ही पल बाद कल्पना गाड़ी से उतरी

और दीपक को ही भला-बुरा कहने लगी।

लेकिन दीपक ने कुछ भी नहीं कहा।

 

खामोशी दीपक की 

 

वह चुपचाप उठा, अपनी साइकिल उठाई और घर की ओर चल दिया।

इतना सब सुनने के बाद भी जब दीपक के

मुँह से एक शब्द भी नहीं निकला, तो कल्पना को थोड़ा शक हुआ।

वह सोचने लगी,

“जो लड़का पहले मुँह तोड़ जवाब देता था, आज इतना खामोश क्यों है?”

उधर दीपक साइकिल लेकर अपने घर पहुँच गया।

जब वह घर पहुँचा, तो घर वालों को पहले तो विश्वास ही नहीं हुआ।

फिर दीपक ने अपने माता-पिता के चरण स्पर्श किए।

ममता और साहिल अपने बेटे को देखकर खुशी से रो पड़े।

कुछ देर बाद दीपक अपनी गाड़ी में बैठा,
और सीधे कल्पना के पार्लर के सामने पहुँच गया।

अहंकार का अंत

 

दीपक को देखकर कल्पना बाहर आई।
उसे देखते ही वह घबरा गई।

दीपक ने अपनी जेब से अपना आई-कार्ड निकाला और कहा,

“मैं हूँ आईएएस ऑफिसर दीपक। तुमने बहुत मनमानी कर ली।

अब तुम्हारा यह जिस्मफरोशी का धंधा नहीं चलेगा।

आज के बाद तुम इस शहर में कहीं भी यह गलत काम नहीं करोगी, समझ गई?”

जब कल्पना को पता चला कि, दीपक एक आईएएस ऑफिसर बन चुका है।

तो वह तुरंत अपना रंग बदलने लगी।

वह बोली:-
“दीपक… मैं तुम्हारी बचपन की दोस्त हूँ। मुझे माफ कर दो। हम दोनों मिलकर यह काम करेंगे।”

इतना सुनते ही दीपक ने उसे जोरदार थप्पड़ मार दिया और कहा,

“ऐसा ही थप्पड़ तुमने मुझे मारा था। आज जब मैं कुछ बन गया हूँ,

तो तुम्हें रिश्तेदारी याद आ रही है।

लेकिन जब मैं गरीब था, तब तुम्हारे लिए मेरी कोई औकात नहीं थी।”

दीपक ने आगे कहा,
“मैंने तुमसे सच्ची मोहब्बत की थी,

लेकिन तुमने कभी मेरी मोहब्बत को समझा ही नहीं।

वक्त कभी एक जैसा नहीं रहता।
वक्त बदला… तुम बुरे कामों में माहिर हो गई और मैं बुरे कामों को खत्म करने में माहिर हो गया।”

फिर दीपक ने अपने सिपाहियों से कहा,
“पूरा पार्लर सील कर
दो।
आज के बाद इस शहर में कोई भी गलत काम नहीं होना चाहिए।”

Note

दोस्तों आपको इस स्टोरी से क्या सीखने के लिए मिला है, हमें जरूर बताइए ।
अगर कुछ सीखने के लिए बताइएगा

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