प्रस्तुत है दुर्गा मां पर विश्वास मां दुर्गा पर अटल विश्वास की एक अद्भुत चमत्कारी कहानी।
दोस्तों इस कहानी में बताया गया है की सच्ची लगन और सच्ची श्रद्धा कभी बेकार नहीं जाती।
माँ दुर्गा पर भगतों का विश्वास की कहानी
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दुर्गा पूजा का समय है अंकित मां दुर्गा की प्रतिमा बनाने में बहुत ही व्यस्त था,
कि अचानक से कलर खत्म हो जाता है, पूरी फिनिशिंग होनी अभी बाकी थी।
अंकित अपने दोस्त मोहित से कहता है, अरे मोहित काम तो भी बाकी है,
और कलर खत्म हो गया है । मां की प्रतिमा को कलर कैसे करोगे, मोहित कहता है:
“तो इसमें सोचने वाली इतना क्या बात है ,जाओ और शहर के दुकान से कलर ले आओ ।
क्योंकि इधर लोकल दुकान में तो कलर मिलाने वाला है नहीं जल्दी जाओ जल्दी से आ जाना।
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दुर्गा माँ पर विश्वास की किस्सा कहानी
अंकित मुस्कुराते हुए कहता है ठीक है तुम इधर का जो काम बचा हुआ है ,
उसे देख लेना मां की प्रतिमा के लिए कपड़ा तैयार करो, मैं कलर लेकर आता हूं।
इतना कहकर अंकित वहां से चल देता है।
अंकित दुकानदार के पास पहुंचता है। और कलर खरीदना है,
और कलर लेकर आ ही रहा होता है , कि रास्ते में उसका एक्सीडेंट हो जाता है ।
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एक्सीडेंट में वह पूरी तरीके से जख्मी हो जाता है , और कलर इधर-उधर बिखर जाता है।
मोहित आस विश्वास देखाता है , नहीं आने के बाद उसे फोन लगता है ,
तो उसका मोबाइल स्विच ऑफ बताता है । कुछ देर के बाद पता चलता है, कि उसका एक्सीडेंट हो गया है।
अगले सुबह जिसके लिए दुर्गा मां की प्रतिमा को अंकित तैयार कर रहा था वह वहां पर आता है।
तो दिखता की अंकित वहीं चेयर पर बैठा हुआ है और उसका हाथ टूटा हुआ है।
वह व्यक्ति जो मां दुर्गा की प्रतिमा बनवा रहा था वह कहता है अब तुमसे काम नहीं हो पाएगा ।
तुम इस काम को छोड़ दो और मेरा पैसा दो , मैंने जो पैसे तुम्हें दिए हैं ।
वह मुझे वापस दो, अब तुमसे हमें मूर्ति नहीं बनवानी है।
इस पर अंकित के भाई मोहित कहता है :
“सर मैं आपका पैसा तो नहीं दे पाऊंगा ,क्योंकि पैसे खर्च हो गए हैं ,”
मैं आपको मूर्ति बनाकर दे दूंगा ,”
लेकिन किसी भी सर पर वह व्यक्ति नहीं मानता है, और जिद मचाने लगता है,
कि मुझे एडवांस के पैसे वापस दो।
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बहुत कहा सुनी के बाद मोहित कहता है
“ठीक है आप कल आ जाना मैं आपका पैसा कल दे दूंगा, “
उसके बाद वह आदमी घर चला जाता है।
सुनी सुनी रात ,दुख भरी कहानी ,के साथ खत्म होती है ,और अगले दिन के सूरज का इंतजार भी खत्म हो जाता है, और इस प्रकार से सुबह हो जाती है।
जहां पर मूर्ति बनाई जा रही थी दोनों भाई उदास मन से वहां बैठे थे अंकित कुर्सी पर बैठा हुआ था ।
दोनों भाई उदास बैठे हुए थे कि तभी झारखंड के रामपुर गांव में एक मुंबई का व्यापारी आता है,
और कहता है गांव वालों से हमें पता चला है कि दो यहां बहुत अच्छे कलाकार हैं।
और वह दोनों दुर्गा मां की प्रतिमा बहुत अच्छे बनते हैं तो लोगों ने अंकित और मोहित का नाम बता कर उनके पास भेज दिया ।
वह व्यापारी अंकित और मोहित के पास पहुंचता है और कहता है:
“भाई तुम्हारे पास एक्स्ट्रा मूर्ति है क्या ,अगर है तो मुझे दे दो . अगर नहीं है ?
तो क्या आप मुझे एक दिन के अंदर मां दुर्गा की प्रतिमा तैयार करके दे सकते हो .
मैं अगले साल भेड़ चढ़ाने का वादा किया था ,लेकिन वक्त बहुत कम रहने के कारण मैं नहीं कर पाया ,
लेकिन मैं मां दुर्गा की प्रतिमा को स्थापित करना चाहता हूं।
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दोनों भाई ने मां दुर्गा की प्रतिमा को दिखा दिया और कहा :
मेरे गांव में एक ऐसा आदमी है, जो मां दुर्गा की प्रतिमा बनवाकर हमसे नहीं ले रहा है,
और अपना पैसा वापस मांग रहा है, आप हमारी थोड़ी सी मदद कर दीजिए ,
बाकी हम आपसे कुछ ज्यादा नहीं मांगते हैं।
व्यापारी ने कहा “कितना एडवांस वापस देना है,उसे गांव वाले व्यक्ति को “
अंकित ने जवाब दिया 2000 सर”
” यह पूरे 20,000 रुपए है, इसे रख लो तुम्हें काम आएगा और मेरे साथ चलो और मां की प्रतिमा को भी लेकर साथ चलो। “
उसके बाद वह मुंबई का व्यापारी मां दुर्गा की प्रतिमा
को लेकर और दोनों भाई को साथ लेकर मुंबई के लिए प्रस्थान कर देता है।
कहानी से शिक्षा
मेहनत सच्ची हो और खुद पर सच्चा विश्वास हो तो इंसान कुछ नहीं कर पाता ।
खुद पर दिल से विश्वास रखो और सच्ची दिल से सच्चे मन से मेहनत करो।
बाकी सब ऊपर वाले पर छोड़ दो सब अच्छा होगा।
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इस कहानी को राइटर पवन सागर द्वारा लिखा गया है अगर कुछ गलती हो जाए तो माफ कीजिएगा।